कांग्रेस के दो राष्ट्रीय सचिव टटोल रहे हैं दावेदारों की पैठ

राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव को बिलासपुर संभाग तो अरुण उरांव को दी गई है बस्तर संभाग की जिम्मेदारी

  • अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो सचिव छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की पैठ टटोल रहे हैं। वे यह भी देख रहे हैं कि सामाजिक के अलावा अन्य समाज में दावेदारों की कितनी पकड़ है। टिकट देने पर चुनाव में जनता उन्हें स्वीकारेगी या नहीं। यह सब कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर हो रहा है।

 

  • छत्तीसगढ़ में नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा, कांग्रेस व जनता कांग्रेस जे ने अभी से चुनावी बिसात बिछा दी है। जकांछ ने तो अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में अपना प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

 

  • भाजपा की ओर से भी तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस इस बार के विधानसभा चुनाव को हल्के में नहीं ले रही है। इस बार प्रत्याशी चयन करने के लिए कांग्रेस अभी से फूंक-फूंककर कदम रख रही है।

 

  • दरअसल, प्रदेश में हर बार कांग्रेस की सरकार बनने का माहौल दिखाई देता है, लेकिन कुछ सीटों से वे पिछड़ जाते हैं। कांग्रेस खेमे में इस पर कई बार मंथन हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव का टिकट बांटने से पहले कांग्रेस आलाकमान ने अपने दो खास राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव और अरुण उरांव को दौरे पर भेज दिए हैं।

 

  • दोनों राष्ट्रीय सचिव को क्रमश: बिलासपुर और बस्तर संभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी के तहत राष्ट्रीय सचिव यादव करीब एक माह से बिलासपुर संभाग के विधानसभा क्षेत्रों में दौरा कर रहे हैं।

 

  • कांग्रेस की राजनीति से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो दोनों राष्ट्रीय सचिव को कांग्रेस आलाकमान ने टास्क देकर यहां भेजा है। इन्हें दोनों संभागों के सभी दावेदारों के संबंध में यह जानकारी हासिल करनी है कि किस विधानसभा में किस वर्ग के मतदाताओं की बाहुल्यता है। दावेदारों की अपने समाज में कितनी पैठ है। इसके अलावा अन्य समाज में वे कितनी दखल रखते हैं। क्षेत्र में उनकी छवि कैसी है। इसका गोपनीय सर्वे कर बंद लिफाफे में रिपोर्ट मंगाई गई है।

 

 

विधायकों की कार्यशैली की पड़ताल

 

 

  • पिछले विधानसभा चुनाव 90 में से 39 विधायक कांग्रेस से जीतकर आए थे। हालांकि इनमें से कुछ विधायक जकांछ के पाले में चले गए हैं। वर्तमान में जो विधायक कांग्रेस में हैं, उनकी कार्यशैली को लेकर भी पड़ताल की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि वे जनता से कैसे पेश आते हैं। जनता जब उनके पास किसी काम को लेकर आती है तो उन्हें कितना तवज्जो देते हैं और उनका काम कराने के लिए किस स्तर तक जाते हैं।

 

 

जातिगत समीकरण पर बंट सकता है टिकट

 

 

  • कांग्रेस आलाकमान द्वारा दिए गए टॉस्क पर नजर डालें तो यह साफ झलक रहा है कि इस बार कांग्रेस जातिगत समीकरण के आधार पर टिकट का बंटवारा कर सकती है। इस बात को इसलिए बल मिल रहा है, क्योंकि विधानसभावार मतदाताओं का वर्ग निकाला जा रहा है और सामाजिक में दावेदारों की पकड़ को परखा जा रहा है।

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