बिलासपुर: मां ने अपने बेटे को दिया जीवन दान…अब मिसमैच ब्लड नहीं है बैरियर…अपोलो हॉस्पिटल ने हासिल की बड़ी सफलता…आसानी से किया जा सकता है किडनी ट्रांसप्लांट…

बिलासपुर।‌‌

  • बिलासपुर के लोकप्रिय हॉस्पिटल अपोलो के डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर एक बड़ा प्रयास किया है। जहां के डॉक्टर ने मिसमैच ब्लड होते हुए भी मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन में सफलता हासिल की है। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डॉक्टर ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि सेंट्रल इंडिया में पहली बार ऐसा प्रयास किया गया है जिसमें मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट मिसमैच ब्लड होने के बाद भी किया गई है।
  • अब यह संभव है कि अगर किसी मरीज का उसके माता पिता या परिवार से ब्लड मैच नहीं भी कर रहा हो तो भी उनके माता पिता मरीज को अपनी किडनी ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।
  • उन्होंने बताया कि अब तक किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए संबंधित व्यक्ति का ऑर्गन और ब्लड ग्रुप मिलना बहुत ही जरूरी था लेकिन अब हमने इसमें सफलता हासिल कर ली है। अब कोई भी मरीज आसानी से ब्लड ग्रुप मैच न होने के बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट करवा सकता है। लेकिन यह बहुत ही खास केस में हीं कराना चाहिए जिसमें लगभग नॉर्मल किडनी ट्रांसप्लांट से दो से तीन लाख अधिक खर्च आता है।

डॉ. जयंत ने बताया…..

  • डॉक्टर जयंत ने बताया की यह प्रयास हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि है अब मिसमैच ब्लड बैरियर नहीं है इसमें मरीज की जान बचाई जा सकती है ।छत्तीसगढ़ में ऐसा केस पहली बार किया गया है जिसमें मरीज का उसके माता-पिता से ब्लड ग्रुप मैच ना करने के बाद भी मां और बेटे का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है और वह स्वस्थ है। डॉक्टर ने बताया कि 23 नवंबर को मरीज तुषार दुबे का ऑपरेशन किया गया है जिसमें हमने सफलता हासिल कर ली है अब मरीज आसानी से अपना जीवन यापन कर सकता है।
  • डॉ जयंत ने बताया की अब तक हम दूरबीन प्रक्रिया से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे और इस ऑपरेशन में भी कुछ खास अंतर नहीं है लेकिन नार्मल किडनी ट्रांसप्लांट से ज्यादा रिस्क होता है जिसमें मरीज को शुरुआती समय में 3 से 6 महीने तक किडनी के रिजेक्शन के चांसेस ज्यादा होते हैं। इसके बाद वह अपने आप सेटल हो जाती है। ।इसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी ,दवाइयां और प्लाज्मा चेंज विधि के की सहायता से मरीज को ठीक किया जाता है। इस ऑपरेशन में एंटीबॉडी के लेवल को कम करके प्लाज्मा को चेंज करते हैं जिससे इंफेक्शन होने ब्लडिंग होने और किडनी के लिए रिजेक्शन होने के चांस कम होते है।

मरीज तुषार ने कहा… भगवान ऐसे मां बाप सभी को दे….

  • मरीज तुषार ने बताया की पहले किडनी को लेकर वह बहुत परेशानी में था। अब वह स्वस्थ है और उसके मां-बाप खेती किसानी कर जीवन यापन करते हैं। तुषार की मां संध्या ने किडनी देकर उसे जीवनदान दिया है। भगवान ऐसे मां बाप सभी को दे । उसकी मां ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट किया है और उसके पिता ने उसके लिए बहुत मेहनत की है।

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