बेलतरा विधानसभा: यहां शहरी वोटर करते हैं विधायक का फैसला… भाजपा-कांग्रेस और जोगी कांग्रेस का फोकस भी इन पर… जनता अभी मौन, पर दे रहे संकेत भी…

बिलासपुर।

  • जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं से मेल-मुलाकात और अपनी पार्टी की रीति-नीति बताने के मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के प्रत्याशी अनिल टाह ने भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को काफी पीछे छोड़ दिया है। वे ऐसे अकेले प्रत्याशी हैं, जो अब तीन से चार बार एक मतदाता के पास पहुंच रहे हैं।
  • इनके बनिस्पत भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के दिन अपनों की नाराजगी दूर करने में गुजर रहे हैं। पिछले दो चुनावों के नतीजे बताते हैं कि बेलतरा विधानसभा में जीत और हार का फैसला शहरी वोटर करते आ रहे हैं। यानी कि इन्हें जिस प्रत्याशी से साध लिया, उनका नैया पार हो जाएगा।
  • बेलतरा विधानसभा का आधा क्षेत्र ग्रामीण है तो आधा शहरी। बिलासपुर शहर के कुछ वार्डों के साथ ही लिंगियाडीह, बहतराई, मंगला, कोनी समेत शहर से लगे अन्य गांव आते हैं। पिछले दो चुनाव यानी कि 2008 और 2013 के नतीजों का विशलेषण करने पर पता चलता है कि जिस प्रत्याशी को शहरी वोटर का आशीर्वाद मिला, वो विधानसभा पहुंच गए।
  • दरअसल, दोनों चुनाव में नतीजे एक जैसे ही आए। नए परिसीमन के बाद सीपत विधानसभा को समाप्त कर उसकी जगह बेलतरा विधानसभा को अस्तित्व में लाया गया। क्षेत्र के बंटवारे भी हुए। सीपत विधानसभा में बिलासपुर शहर का कोई वार्ड शामिल नहीं था।
  • नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में शहर के कुछ वार्डों को भी शामिल किया गया है। शहर से लगी ग्राम पंचायत कोनी, सेंदरी, मंगला, लिंगियाडीह में बड़ी संख्या में वोटर है। 2008 में जब मतों की गिनती हुई तो ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस लीड करते आई।
  • जब ग्राम पंचायत कोनी के वोटों की गिनती हुई तो यहां से कांग्रेस की लीड कम हो गई। मंगला पंचायत के वोटों की गिनती होते तक कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी के वोट लगभग बराबर हो गए। शहर के वार्डों में पड़े वोटों की गिनती शुरू होते ही भाजपा की लीड बढ़नी शुरू हुई, जो लिंगियाडीह पंचायत की मतगणना तक जारी रही और भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव जीत लिया।
  • कमोबेश यह स्थिति 2013 के चुनाव में रही। दोनों चुनावों के नतीजे से यह साफ हो गया है कि बेलतरा के भावी विधायक का फैसला शहरी वोटर करते हैं। इसलिए भाजपा-कांग्रेस के अलावा जनता कांग्रेस के फोकस में यही शहरी वोटर हैं।

सुख-दुख में साथ देने वाले को चुनने का संकेत

  • 2008 में हुए परिसीमन से पहले भी जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी अनिल टाह बिलासपुर विधानसभा से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। 1998 में इंजन छाप के साथ तो 2003 में कांग्रेस के टिकट से। उस समय शहर के सारे वार्ड बिलासपुर विधानसभा में शामिल थे। उस समय किए गए जनसंपर्क और मतदाताओं के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास अब रंग ला रहा है।
  • जनता के बीच चर्चा है कि भाजपा प्रत्याशी रजनीश सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू को वो जानते हैं, लेकिन अनिल टाह से उनका पुराना रिश्ता है। जनता कह रही है कि 2003 और 2008 के चुनाव में भी वे कई बार आए थे और अब भी आ रहे हैं।
  • हालांकि जनता अभी मौन है और वोट का फैसला करने के लिए इंतजार कर रही है, लेकिन संकेत यही है कि वे उनका ही चुनाव करेंगे, जो उनके सुख-दुख में बराबर का साथ देते आ रहा है।

शोभा टाह स्मृति स्वास्थ्य शिविर से जुड़े हैं लोग

  • जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी बनने के पहले से ही अनिल टाह अपनी पत्नी शोभा टाह की स्मृति में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते आ रहे हैं। शिविर में कई बीमारियों का नि:शुल्क इलाज कराते आए हैं। इस शिविर के माध्यम से भी शहरी वोटर उनसे सीधे जुड़े हुए हैं।

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