बिलासपुर लोकसभा: अटल को टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर… चल रहा जश्न का सिलसिला… चुनाव तक यही जोश बरकरार रखने की जरूरत…

बिलासपुर। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री अटल श्रीवास्तव को लोकसभा का टिकट मिलने पर कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। शनिवार की रात से आज तक जश्न का सिलसिला चल रहा है। रंग-गुलाल और पटाखे फोड़कर कार्यकर्ता अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं। रविवार सुबह अटल श्रीवास्तव ने रतनपुर स्थित मां महामाया दरबार पहुंचकर परिवार सहित आशीर्वाद लिया। गिरजावन हनुमान मंदिर, भैरोबाबा, लाल खदान हनुमान मंदिर में भी उन्होंने मत्था टेका।

कांग्रेस भवन में जिले एवं शहर के कार्यकर्ताओं ने अटल श्रीवास्तव का स्वागत किया। मस्तूरी विधानसभा में पूर्व निर्धारित कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। उसके पश्चात् महमंद गुरुनानक चौक, गांधी चौक, नेहरू चौक में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विजय केशरवानी, नरेंद्र बोलर, शेख नजुरुद्दीन, विधायक शैलेश पाण्डेय, महेश दुबे, राजेन्द्र शुक्ला, शेख गफ्फार, शिवा  मिश्रा  एस.पी.चतुर्वेदी, विवेक बाजपेयी, अर्जुन तिवारी, सुनील शुक्ला, सीमा पाण्डेय, अनीता लवरात्रे जावेद मेमन, तैय्यब हुसैन,विनोद साहू, अरविंद शुक्ला, अजय यादव, शिद्धान्शु मिश्रा, राकेश सिंह, धर्मेश शर्मा, शिवा नायडू, तनवीर छाबड़ा, नसीम खान, इसाख कुरैशी, ब्रम्ह देव ठाकुर सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।

15 साल की मेहनत का मिला इनाम

लम्बे  जद्दोजहद और अपेक्षित मापदण्डों पर खरा उतरने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अटल श्रीवास्तव को बिलासपुर संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बना दिया। उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में शामिल  नहीं है। इंजीनियरिंग की पढाई के बाद उन्होंने तात्कालिक राजनीति के चाणक्य अर्जुन सिंह को आदर्श मानते हुए तीन दशक पूर्व कांग्रेस की सदस्यता ली। फिर बाद में मंत्री स्व. बीआर यादव, बीडीए अध्यक्ष स्व. राम बाबू सोंथालिया की सरपरस्ती में राजनिति का क.क.ह.रा.सीखा। संगठन क्षमता के गुण होने के कारण वे अरपा बचाओ आन्दोलन और अरपा महोत्सव के आयोजकों में शामिल रहे। अपने कार्यों के जरिए वे अपनी मित्र-मण्डली में लोकप्रिय हो गए।

फिर आया कांग्रेस का अवसान काल तो सभी ने पार्टी की गतिविधियों से हाथ खींच लिया। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री रहते हुए उन्होंने सभी आंदोलनों में कांग्रेस का परचम लहराया। आखिर पन्द्रह साल के लम्बे अन्तराल के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी और अटल श्रीवास्तव को संसदीय उम्मीदवार के रूप में आलाकमान ने उन्हें संसदीय नुमायेंदी करने के लिए चुना। शायद किसी ने ठीक ही कहा है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।

एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में पढ़े-बड़े अटल ने शायद इस जीवन में किसी से धोखा नहीं किया। यही परिवार की असली प्रतिष्ठा है। पेशे से इंजीनियर अटल श्रीवास्तव का सपना है कि बिलासपुर नियमित हवाई सेवा से जुड़े। एसईसीएल, एनटीपीसी, रेलवे सहित तमाम केन्द्रीय उपक्रमों का क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर में खुले, जिस तरह पन्द्रह वर्षों तक भाजपा ने लोगों को छोटी-मोटी सुविधाओं के लिए लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया है कि जिन्दा कौमे बहुत दिनों तक इन्तेजार नहीं करती। वे व्यवस्था को ही बदल देते हैं।

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