बिलासपुर लोकसभा: अपराजय गढ़ को बचाने के लिए भाजपा बहा रही पसीने तो कांग्रेस गिना रही खामियां… ये हैं चुनाव के बड़े मुद्दे…

छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में रायपुर के बाद बिलासपुर ही एकमात्र ऐसी सीट है, जहां भाजपा लगातार जीत रही है। यह सीट भाजपा के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रही है। बिलासपुर लोकसभा सीट का तीन बार परिसीमन हुआ है। शुरुआत में यह सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित थी। इसके बाद इसमें बदलाव करते हुए इसे अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। वर्ष 2009 में इसे एक बार फिर सामान्य कर दिया गया। वर्ष 1996 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। वर्ष 1996 से 2004 के बीच चार बार हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के पुन्नूलाल मोहले यहां से सांसद रहे। मोहले के नाम  लगातार चुनाव जीतने का कीर्तिमान भी रहा है। मोहले के बाद भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप सिंह जूदेव चुनाव लड़े। वर्ष 2009 में जूदेव सांसद निर्वाचित हुए। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को प्रत्याशी बनाया था। वर्ष 2014 के चुनाव में बिलासपुर सीट राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में फिर सफल हुई। पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को कांग्रेस ने यहां से उम्मीदवार बनाया था। सर्वाधिक वोटों के अंतर से चुनाव हारने का कीर्तिमान करुणा  के नाम रहा। एक लाख 75 हजार वोटों के अंतर से वे भाजपा के एक सामान्य कार्यकर्ता लखनलाल साहू से चुनाव हार गईं। तब समूचे देश के साथ ही बिलासपुर लोकसभा सीट में भी पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर का जोर दिखाई दिया था। यहां ओबीसी वर्ग की बहुलता है। इसमें साहू व कुर्मी की जनसंख्या सबसे ज्यादा है। ओबीसी में यादव भी प्रभावी भूमिका में है। अपराजय गढ़ को बचाने के लिए भाजपा लगातार पसीने बहा रही है और सांसद प्रत्याशी अरुण साव के चेहरे के बजाय पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर वोटरों के पास जा रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस भी सीएम भूपेश बघेल द्वारा मात्र 60 दिन में किए गए फैसले को जनता के सामने रख रही है और कांग्रेस प्रत्याशी अटल श्रीवास्तव को दिल्ली पहुंचाने के लिए कार्यकर्ता कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे सांसद लखन लाल साहू की निष्क्रियता और मोदी सरकार की वादाखिलाफी को घर-घर पहुंचा रहे हैं।

 8 विधानसभा क्षेत्र  हैं यहां

बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में दो जिला बिलासपुर व मुंगेली को शामिल किया गया है।  भाजपा के कब्जे वाली विधानसभा सीटें हैं- बिल्हा, मस्तूरी, बेलतरा व मुंगेली। इसी तरह कांग्रेस के कब्जे वाली सीटें तखतपुर व बिलासपुर हैं और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के कब्जे वाली सीटें हैं कोटा व लोरमी।

विकास का हाल और स्थानीय मुद्दे

बिलासपुर में घरेलू हवाई सेवा के लिए अनुमति मिल चुकी है। रायपुर बिलासपुर सिक्स लेन रोड अंतिम चरण में  है। 3762 करोड़ की लागत से बिलासपुर कटघोरा फोरलेन बनेगा। इस पर काम शुरू हो चुका है। 4606 करोड़ की लागत से बनने जा रही अरपा भैंसाझार बैराज परियोजना का अंतिम चरण में है। बिलासपुर से रायपुर सड़क मार्ग पर स्थित तिफरा फ्लाई ओवर का काम शुरू है। बिलासपुर स्मार्ट सिटी घोषित हो चुका है और काम शुरू हो चुका है। यहां के प्रमुख स्थानीय मुद्दे हैं- चकरभाठा एयरपोर्ट से हवाई सेवा की शुरुआत न होना, चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निवेशक व एजेंटों की लामबंदी, शराबबंदी को लेकर ग्रामीण लगातार बना रहे दबाव, जिला खनिज न्याय फंड में करोड़ों का घोटाला।

चुनाव परिणाम 2014

लखन लाल साहू BJP 561,387 32%

करुणा शुक्ला INC 384,951 22%

धरम भार्गव BSP 26,340 1%

लखन लाल साहू: विजयी सांसद – 2014

छत्तीसगढ़ में लखन लाल साहू भाजपा से जुड़े हैं। वह 2014 में 16वीं लोक सभा के लिए भाजपा के टिकट पर बिलासपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीते। पेशे से वकील लखन साल 2005 से लेकर 2010 तक जिला पंचायत के सदस्‍य रहे। एक सितंबर, 2014 से रेल संबंधी स्‍थायी समिति के सदस्‍य हैं। 15 सितंबर, 2014 से संसद, सदस्‍य स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपीलैड्स संबंधी समिति, परामर्शदात्री समिति, कोयला मंत्रालय के सदस्‍य हैं। 9 दिसंबर, 2014 से हिंदी समिति और वस्त्र मंत्रालय के सदस्य भी हैं।

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