बिल्हा विधानसभा: पथरिया क्षेत्र के गांवों में पानी, सड़क के लिए हाहाकार… 15 साल में भाजपा ने नहीं दिया ध्यान… विधायक बदलने के बाद भी समस्याएं नहीं हुईं खत्म… पैदल स्कूल जाती हैं हाई और हायरसेकेंडरी स्कूल लड़कियां… पढ़िए अंकिता द्विवेदी की ग्राउंड रिपोर्ट…

अंकिता द्विवेदी। बिलासपुर

  • बिल्हा विधानसभा क्षेत्र… प्रदेश भाजपाध्यक्ष धरमलाल कौशिक का गढ़… कांग्रेस से चुनकर आए सियाराम कौशिक की कर्मस्थली… प्रदेश में 15 साल से भाजपा की सरकार… पांच साल पहले विधायक का तखता इसलिए पलटा, ताकि क्षेत्र में विकास की किरण पहुंच जाए… पर ऐसा नहीं हुआ।
  • राज्य निर्माण से अब तक पथरिया क्षेत्र के अधिकांश गांवों में पानी, सड़क के लिए हाहाकार मचा हुआ है। दोनों पार्टियों को बिल्हा की बागडोर सौंपने के बाद जनता पछता रही है। यहां की जनता को तीसरी शक्ति की तलाश है।
  • बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में कुर्सी पाने को लेकर भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के अलावा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे जोर-आजमाइश कर रही हैं। हर पार्टी के प्रत्याशी और उनकी टीम ने क्षेत्र के गांवों में प्रचार युद्ध छेड़ रखा है।
  • भाजपा जहां विकास के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ रही है तो कांग्रेस भाजपा के भ्रष्टाचार को सामने रखकर चुनावी घोषणा पत्र के जरिए वोटरों को रिझाने की कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी दिल्ली की तर्ज पर यहां सुविधाएं दिलाने का वायदा कर रही है तो जोगी कांग्रेस भाजपा और कांग्रेस की नाकामियों को गिना रही है।
  • राजनैतिक दलों के लुभावने वायदे के बीच जनता अपनी समस्याएं गिना रही हैं। इन समस्याओं को सरकार बनने के बाद तत्काल निराकरण करने का आश्वासन भी प्रत्याशी दे रहे हैं।
  • आजकल.इंफो की टीम ने पथरिया क्षेत्र के किरना, दलपुरवा, पेंड्री, बावली, रोहरा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों की ग्राउंड रिपोर्ट की। दलपुरवा गांव में इन दिनों धान की कटाई चल रही है। एक खेत में चार ग्रामीण धान काट रहे थे।
  • पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि गांव में राशन, पेंशन तो समय पर मिल रहा है, लेकिन सड़क की हालत खराब है। करीब 1200 आबादी वाले गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। पांच सरकारी ट्यूबवेल पर सारा गांव निर्भर है।
  • पिछली गर्मी में ट्यूबवेल का जलस्तर रसातल में चला गया था, तब गांव में पानी के लिए खूब हाहाकार मचा था। उस समय गांव के कुछ प्राइवेट ट्यूबवेल से पूरे गांव की प्यास बुझ रही थी।
  • पानी की व्यवस्था करने के लिए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विधायक सियाराम कौशिक से लेकर प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक तक से गुहार लगाई, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। अबकी बार ग्रामीण भाजपा और कांग्रेस के अलावा जोगी कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे विधायक सियाराम को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति हर गांव में मिली।

ग्रामीण बोले- विकल्प की है तलाश

  • आगामी सरकार के बारे में पूछताछ करने पर ग्रामीण झल्ला गए। उनका कहना था कि राज्य का निर्माण हुए 18 साल हो गए हैं। इतने साल किसी राज्य को संवारने में पर्याप्त है, लेकिन शहर की तरह सुविधा तो दूर गांव में 18 साल पुरानी वाली स्थिति है।
  • हमने कांग्रेस की सरकार को देख लिया और भाजपा की सरकार को 15 साल से देखते आ रहे हैं। अब हम तीसरी पार्टी की सरकार को देखना चाहते हैं।

असुरक्षा के बीच स्कूल से पैदल लौटती हैं लड़कियां

  • पथरिया क्षेत्र के अधिकांश गांवों में हाई और हायरसेकेंडरी स्कूल नहीं है। गांव में मिडिल तक पढ़ाई करने के बाद लड़कियों को तीन से चार किलोमीटर तक दूसरे गांव में स्थित हाई और हायरसेकेंडरी स्कूल में दाखिला लेना पड़ता है।
  • एक गांव के खेत में काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि उनकी बेटियां चार किमी दूर हायरसेकेंडरी की पढ़ाई करने पथरिया जाती हैं। दो साल पहले से सरस्वती साइकिल योजना के तहत उनसे फार्म भरवाए गए हैं, लेकिन अब तक गांव की किसी भी बच्ची को साइकिल नहीं मिली है।
  • इसलिए पैदल जाने और आने की मजबूरी है। जब तक बेटियां स्कूल से नहीं लौटतीं, उन्हें उनकी चिंता लगी रहती है। दरअसल, पैदल आने में बेटियों को 30 से 40 मिनट तक लग जाते हैं।

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