छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश ने पीएम मोदी को लिखा पत्र… कोल आवंटन में प्रदेश के हितों की संरक्षण की वकालत… कहा- 2014 के बाद बनी नीति से भारी नुकसान… पढ़िए पूरा पत्र…

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कोल ब्लाक आवंटन में छत्तीसगढ़ के हितों के संरक्षण की वकालत की है। सीएम ने कोल ब्लाक आवंटन को लेकर केंद्र सरकार की नई नीति से छत्तीसगढ़ को होने वाले नुकसान रायल्टी हानि का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि 2014 के बाद से जो नीति बनी है, उससे छत्तीसगढ़ को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

सीएम के अनुसार 2014 से पहले छत्तीसगढ़ में कुल 42 कोल ब्लाक थे, जिनमें से 7 कोल ब्लाक छत्तीसगढ़ 9 कोल ब्लाक अन्य राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमों को आवंटित किया गया था। इसके अलावा 24 कोल ब्लाक निजी उपक्रमों और 2 संयुक्त उपक्रमों को आवंटित किए गए थे। छत्तीसगढ़ के हिस्से के 7 ब्लाकों से 2600 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था। 2014 से पहले कोयले पर सरकार को रायल्टी मिलता था, लेकिन 2014 में बदली नई कोयला नीति के बाद राज्य के लिए रायल्टी के साथ प्रीमियम की व्यवस्था कर दी गई।

2014 में नई कोयला नीति में केवल राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमोविद्युत कंपनियों के लिए कोल ब्लाक आवंटन की व्यवस्था की गई, लेकिन नई आवंटन नीति में छत्तीसगढ़ के कोल ब्लाक की संख्या 7 से घटकर 3 हो गई। स्टाक 2600 मिलियन टन से घटकर सिर्फ 660 मिलियन टन रह गया। 42 कोल ब्लाक में सिर्फ 15 कोल ब्लाक को ही आवंटित किया गया, जिनमें से एक ब्लाक रद्द हो गया।

रायल्टी के अतिरिक्त प्रीमियम की वजह से भी छत्तीसगढ़ को बड़ा नुकसान हुआ। पत्र में लिखा गया है कि 2015 में अतिरिक्त प्रीमियम की व्यवस्था से उपक्रमों में 2291 से बढ़ाकर 3502 प्रतिटन की बोली लगी, जिसमें महज भारत सरकार ने 100 रुपए प्रति मीट्रिक टन की प्रीमियम की व्यवस्था की। जाहिर है, अन्य राज्यों को आवंटित ब्लाक के कुल भंडार  3700 मिलिटन टन पर छत्तीसगढ़ को सिर्फ 100 रुपए प्रति टन का प्रीमियम मिला होगा। पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि प्राइवेट सेक्टर की तरफ से बोली के आधार पर 2500 प्रीमियर प्रति टन की स्वीकृति दी जाती तो आदिवासी बहुल इलाकों में अतिरिक्त आय होती। इसे लेकर छत्तीसगढ़ को 9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।

दिए ये सुझाव

पत्र में सीएम बघेल ने इस बात को लेकर ऐतराज जताया है कि आवंटन प्रक्रिया में भी राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं रखी गई है। राज्य खनन को लेकर किसी तरह का कोई फैसला नहीं ले सकता। बघेल ने प्रधानमंत्री को कुछ सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने लिखा है कि कोल ब्लाक आवंटन में राज्य की सहमति का प्रावधान किया जाए। अन्य राज्यों को आबंटित ब्लाक में भी बोली के आधार पर प्रीमियर की व्यवस्थी का जाए। प्रीमियम की राशि 100 रुपए प्रति टन से बढ़ाकर कम से कम 500 रुपए प्रति टन किया जाए। अन्य राज्यों की विद्युत इकाइयों से छत्तीसगढ़ को सस्ते कोयले के एवज में उत्पादित विद्युत का हिस्सा दिया जाए।

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